पहली र|त
ऐ सखी , तुम बताओ की कैसे करुँगी मै बात ?
मन में होती है हलचल, कैसे बिताउंगी रात ?
उठाएंगे वे मेरा घूँघट, तो शरमएंगे हम ,
उन की नजरो को न रोक पाएँगे हम ,
न जाने वह कैसे बिताउंगी रात ,?
मन में होती है हलचल, कैसे बिताउंगी रात ?
पिया के सामने सांसे चलेंगी न थम के ,
धकधक करे दिल, साथ डोलेगी बाली झमझम के,
न भेजो तारो से चांदनी, ऐसी तुम से फरियाद ,
मन में होती है हलचल, कैसे बिताउंगी रात ?
बढाएँगे मेरे साजन, तो कैसे होगी छुअन ?
कांप उठेगा बदन , कैसे सहूंगी इतनी जलन ?
बुलाने पर भी नहीं आएगा बैरी सावन,
मन में होती है हलचल, कैसे बिताउंगी रात ?
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