Sunday, 27 November 2011

पहली र|त


                  पहली  र|त 
सखी , तुम बताओ  की कैसे करुँगी  मै बात ?
  मन में होती है हलचल, कैसे  बिताउंगी रात ?
       उठाएंगे वे मेरा घूँघट, तो शरमएंगे हम ,
              उन की नजरो को रोक पाएँगे हम ,
                        जाने  वह  कैसे बिताउंगी रात  ,?
  मन में होती है हलचल, कैसे बिताउंगी रात ?
            पिया  के  सामने सांसे चलेंगी थम के ,
  धकधक करे दिल, साथ डोलेगी बाली झमझम  के
      भेजो तारो से चांदनी, ऐसी तुम से फरियाद ,
         मन में होती है हलचल, कैसे बिताउंगी रात ?
  बढाएँगे मेरे साजन, तो कैसे होगी छुअन ?
       कांप उठेगा बदन  , कैसे सहूंगी इतनी जलन ?
               बुलाने पर भी नहीं आएगा बैरी सावन
      मन में होती है हलचल, कैसे बिताउंगी रात ?

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